बसपा नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, यूपी के दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर नजर जानिए

बसपा नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, यूपी के दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर नजर जानिए

बसपा नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, यूपी के दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर नजर जानिए। नसीमुद्दीन की आमद में कांग्रेस में दो मत, लेकिन मकसद बड़ा संकेत देना बसपा के पूर्व नेता व मायावती सरकार में नंबर दो माने-माने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी गुरुवार को अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि, कांग्रेस में उनकी आमद इतनी आसान व सर्वमान्य नहीं रही। कांग्रेस ने बाकायदा एक रणनीति के तहत संकेत देने के लिए भी नसीमुद्दीन की तरफ हाथ बढ़ाया है। भले ही कांग्रेस ने नसीमुद्दीन के हाथ में पंजा थमा दिया हो, लेकिन सचाई यह भी है कि मायावती के साथ उनकीं दूरियां बढ़ने के पीछे की वजह और तरीके को लेकर पार्टी में थोड़ा अविश्वास भी है। लेकिन इतनी बड़ी तादाद में बसपा के पूर्व नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराने के पीछे एक मकसद यह संकेत देना भी माना जा रहा है कि कांग्रेस धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। इसके पीछे एक वजह यह भी माना जा रहा है कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस की पकड़ बढ़ रही है और कांग्रेस भाजपा को मजबूत टक्कर देने व उसके विकल्प के तौर सक्षम है।

बसपा नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, यूपी के दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर नजर

दरअसल, नसीमुद्दीन को लेकर कांग्रेस में दो मत रहे हैं। एक तबका सिद्दीकी के आने को ठीक मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक तबका ऐसा भी है, जिसे लगता कि नसीमुद्दीन जैसे नेता पर ज्यादा भरोसा करना ठीक होगा? सूत्रों के मुताबिक, यूपी की राजनीति को गंभीरता से देख रहे एक अहम रणनीतिकार का मानना है कि सिद्दीकी की शख्सियत, कार्यशैली और तरीके को लेकर एकदम से कुछ कहना ठीक नहीं होगा। बताया जाता है कि इस तबके ने बाकायदा अपनी राय भी उच्च स्तर पर रखी। लेकिन पार्टी में बड़े मकसदों को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने का फैसला हुआ।

बसपा नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, यूपी के दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर नजर जानिए

विपक्षी दलों की एकजुटता की दिशा में हो रहे प्रयायों के मद्देनजर बसपा के रुख को देखते हुए फिलहाल कांग्रेस बसपा पर पूरी तरह से भरोसा नहीं कर पा रही है। पार्टी को कहीं न कहीं लग रहा है कि भाजपा के दबाव में बसपा है, इसलिए वह बसपा के मामले में पूरी सावधानी से आगे बढ़ रही है। इसके अलावा, पिछले दिनों हुए कुछ घटनाक्रमों के मद्देनजर कांग्रेस के भीतर बसपा को लेकर नाराजगी है। गुजरात में बसपा के चलते कांग्रेस को कई जगह लगे झटके और कनार्टक में बसपा का जेडीएस से हाथ मिलाना भी कांग्रेस के लिए मुश्किल का सबब बन रहा है। कांग्रेस को लगता है कि कनार्टक में बसपा का जेडीएस के साथ आने के पीछे कहीं न कहीं भाजपा का दबाव है, जो कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा करने जैसा है।

बसपा नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, यूपी के दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर नजर जानिए

खबरों की मानें तो नसीमुद्दीन का कांग्रेस से जुड़ना कहीं न कहीं उत्तर प्रदेश में मायावती को झटका देना है। भले ही कांग्रेस कह ले कि व्यापक गठबंधन में बड़े लक्ष्यों का ध्यान रखा जाता है, लेकिन सचाई है कि फिलहाल कांग्रेस गुजरात और कनार्टक में बसपा के दांव को भूल नहीं पा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की नजर मायावती के मुस्लिम व दलित वोट बैंक पर है, जो कभी बुनियादी तौर पर कांग्रेस का हुआ करता था। कांग्रेस ने इस वर्ग में अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए भी यह कदम उठाया है। यहां जानना रोचक होगा कि कांग्रेस की नजरें उत्तर प्रदेश में उभरते हुए दलित नेता व भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर पर भी लगी है। बताया जाता है कि कांग्रेस पर्दे के पीछे से उससे संपर्क में है। वह भी अपनी ओर से संकेत भेज रहे हैं। पिछले दिनों चंद्रशेखर द्वारा राहुल गांधी की तारीफ भी इसी चश्मे से देखा जा रहा है।

बसपा नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, यूपी के दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर नजर जानिए

कभी मायावती के भरोसेमंद सिपहसलार रहे यूपी की राजनीति का एक बड़ा नाम नसीमुद्दीन सिद्दिकी ने अपने साथियों के साथ गुरुवार को कांग्रेस का हाथ थाम लिया। अपनी पत्नी व 97 अन्य साथियों के साथ कांग्रेस के खेमे में आए नसीमुद्दीन ने गुरुवार को कहा कि देश में सिर्फ कांग्रेस ही ऐसी है, जो देश का विकास कर सकती है। नसीमुद्दीन के साथ बीएसपी से जुड़े कुल 99 लोगों ने कांग्रेस का हाथ थामा, इनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व विधान परिषद सदस्य जैसे लोग शामिल थे। लगभग 34 साल तक बसपा में रहने के बाद कांग्रेस में अपने शामिल होने पर नसीमुद्दीन ने कहा कि बसपा से निकाले जाने के बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ जो बहुजन समाज मोर्चा बनाया था, उसे वह आज से कांग्रेस में विलय कर रहे हैं। गुरुवार को कांग्रेस में शामिल होने वाले पूर्व बसपा नेताओं में पूर्व एमएलसी व नसीमुद्दीन की पत्नी हुस्ना सिद्दीकी, ओपी सिंह, रघुनाथ प्रसाद शंकवार, अनिल अवाना, राव वारिस, हाजी शाबान, लियाकत अली, अच्छे लाल निषाद, वीरेंद्र व्यास, अरशद खान, ब्रम्हस्वरूप सागर, देशराज रिछारिया, शंकर भुर्जी, प्रीतम सिंह प्रेमी, कैप्टन दिनेश सिंह, केपी मावी व जमीरुद्दीन सिद्दीकी जैसे चेहरे प्रमुख थे। उल्लेखनीय है कि नसीमुद्दीन सैकड़ों की तादाद में अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस ऑफिस पहुंचे।

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