जिनपिंग आजीवन बने रह सकते हैं प्रेसिडेंट, भारत के लिए ऐसे हो सकते हैं खतरा

जिनपिंग आजीवन बने रह सकते हैं प्रेसिडेंट, भारत के लिए ऐसे हो सकते हैं खतरा

जिनपिंग आजीवन बने रह सकते हैं प्रेसिडेंट, भारत के लिए ऐसे हो सकते हैं खतरा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो चुका है। रविवार को चीन की संसद ने संविधान से उस नियम को हटा दिया जिसके तहत कोई भी शख्स सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति रह सकता है। इसके साथ ही जिनपिंग जब तक चाहें तब तक देश के राष्ट्रपति रह सकते हैं। बता दें कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने पिछले हफ्ते संसद में इस सिलसिले में प्रस्ताव पेश किया था। वोटिंग में कांग्रेस के 2964 सदस्यों में से सिर्फ दो ने राष्ट्रपति बनने की सीमा बढ़ाए जाने के खिलाफ वोट किया, जबकि तीन सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

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शी जिनपिंग 2012 में पहली बार चीन के राष्ट्रपति चुने गए थे। पिछले साल हुई कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस (CPC) की बैठक में उन्हें दोबारा राष्ट्रपति चुना गया है। उनका दूसरा कार्यकाल 2023 तक चलेगा।
इसके अलावा बैठक में जिनपिंग को दूसरी बार पार्टी प्रमुख भी चुना गया था। कांग्रेस ने उनके विचारों को संविधान में शामिल करने का फैसला किया था। राष्ट्रपति के लिए 2 कार्यकाल की सीमा खत्म होने के बाद जिनपिंग अब माओत्से तुंग के बाद चीन के सबसे शक्तिशाली नेता बन गए हैं।

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बता दें कि चीन में राष्ट्रपति डेंग जाओपिंग ने 1982 में एक विधेयक पेश किया था। इसके तहत अगला कोई भी राष्ट्रपति दो बार से ज्यादा इस पद पर नहीं रह सकता था। माना जाता है कि जाओपिंग ने ये कदम माओत्से तुंग के 1966-76 के कार्यकाल की वजह से लिया था। इस दौरान चीन में हुई सांस्कृतिक क्रांति में कई नागरिकों की जान गई थी। पिछले साल अक्टूबर में जिनपिंग के खास 69 साल के वांग किशान ने पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया था। चीन में 70 साल की उम्र के बाद अधिकारी अपने पद पर नहीं रह सकते। हालांकि, इस्तीफा देने के बाद इसी साल उन्हें संसद प्रतिनिधि बनाया गया। सूत्रों के मुताबिक, चीन की लीडरशिप उन्हें उपराष्ट्रपति बनाना चाहती है।

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अगर 70 साल की उम्र के बाद भी वांग ने अपने प्रतिनिधि पद से इस्तीफा नहीं दिया तो शी जिनपिंग का दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति बनना तय हो जाएगा। हालांकि, ऐसा नहीं होने पर जिनपिंग पर इस्तीफे का नैतिक दबाव बनेगा। चीन में पार्टी अध्यक्ष का रोल राष्ट्रपति से भी ज्यादा बड़ा माना जाता है और जिनपिंग को पार्टी में जल्द ही वो स्थान दिया जा सकता है। जिससे 2023 में राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी वो चीन के सबसे ताकतवर शख्स बने रह सकते हैं।

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आजीवन प्रेसिडेंट बने रहने की आजादी से जिनपिंग को असीमित ताकत मिल जाएगी। इस हाल में चीन फॉरेन पॉलिसी, इंडो पेसिफिक या हिंद महासागर क्षेत्र और लाइन ऑफ कंट्रोल पर अपनी ताकत दिखा सकता है। ये भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। जिनपिंग के प्रेसिडेंट बने रहने से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को बढ़ावा मिलेगा, जिसका भारत शुरू से विरोध करता आया है। इसके अलावा बीआरआई प्रोजेक्ट पहले से ही भारत की चिंता है, जिसमें वन बेल्ट वन रोड के जरिए चीन दुनिया भर के देशों को आपस में जोड़ने में लगा है। जिनपिंग के प्रेसिडेंट बने रहने पर इसे और बढ़ावा मिलेगा। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान आर्थिक तौर पर चीन पर निर्भर होता जा रहा है, जो ठीक नहीं। जिनपिंग को ताकत मिलने के बाद वो भारत के पड़ोसी देशों में दखल बढ़ाने की कोशिश करेगा, जिससे भारत को नुकसान हो सकता है। कई एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि जिनपिंग का ताकतवर होना किसी भी लोकतान्त्रिक देश के लिए सबसे बड़ा खतरा हो सकता है। ऐसे में किसी भी फैसले को संस्थागत होने के बजाय व्यक्तिगत होने को बढ़ावा मिलेगा।

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