रोटोमैक घोटाला आयकर विभाग ने कंपनी के 11 बैंक खाते किए अटैच जानिये खबर

रोटोमैक घोटाला आयकर विभाग ने कंपनी के 11 बैंक खाते किए अटैच जानिये खबर

रोटोमैक घोटाला आयकर विभाग ने कंपनी के 11 बैंक खाते किए अटैच जानिये खबर। रोटोमैक कंपनी के विक्रम कोठारी पर 3695 करोड़ के घोटाले के आरोप लगने के बाद ईडी, सीबीआई और अब आयकर विभाग भी सक्रिय हो गया है। खबरों के अनुसार आयकर विभाग ने कंपनी के 11 बैंक खाते अटैच कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार 85 करोड़ का बकाया टैक्स वसूलने के लिए प्रोविजनल अटैचमेंट एक्शन लिया गया है।

रोटोमैक घोटाला आयकर विभाग ने कंपनी के 11 बैंक खाते किए अटैच

बता दें कि कानपुर में उनके ठिकानों पर सीबीआई और ईडी की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी है। इस बीच सीबीआई की एक टीम विक्रम कोठारी की पत्नी को लेकर बैंक पहुंची है। करीब 11:20 पर सीबीआई की एक टीम विक्रम कोठारी की पत्नी साधना कोठारी को भूरे रंग की कार में बैठाकर ले गई है माना जा रहा है कि उन्हें बैंक ले जाया गया है जहां पर खातों की और लाकर की जांच हो सकती है इसके अलावा एनसीएलटी की टीम के भी आने की संभावना जताई जा रही है।

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विक्रम कोठारी के मामले में सीबीआई की जांच में यह बिंदु भी शामिल है कि किसी भी मैन्यूफैक्चरिग यूनिट को कितना बड़ा ऋण दिया जा सकता है और कितना दिया गया है। इस बिंदु पर जांच होने से यह पता चलेगा कि ऋण देने में कितने नियमों का पालन किया गया। ऋण के मुताबिक कितनी सिक्योरिटी ली गई और कितनी ली जानी चाहिए थी। जांच में इन बिंदुओं के शामिल होने के बाद से बैंक के अधिकारी चुप्पी साधे हैं। 2006 में जारी स्माल एंड मीडियम स्केल इंटरप्राइजेज एक्ट 2006 में प्रावधान किया गया था कि निर्माण क्षेत्र की किसी भी इकाई में मशीनरी और इक्विपमेंट में 25 लाख से पांच करोड़ रुपये तक का निवेश करने पर उसे एसएमई सेक्टर की कंपनी माना जाएगा। यानी कंपनी का पूंजी निवेश पांच करोड़ से कम होगा। अब इसे पांच करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ रुपये कर दिया गया है। जब रोटोमैक पेन कंपनी को ऋण दिया गया था, तब मशीनरी एवं इक्विपमेंट में निवेश पांच करोड़ से कम था। ऐसे में फैक्ट्री लघु उद्योग की श्रेणी में आती है।

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एक अधिकारी ने बताया कि एक कंपनी को आखिर कितना ऋण दिया जा सकता है। स्माल स्केल इंडस्ट्री को इतना बड़ा लोन देने के लिए कंसोर्टियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल भी सबके जेहन में है। ऐसे में ऋण देने में कितने नियमों का पालन किया गया और क्या गारंटी ली गई, जांच का यह भी अहम बिंदु है। सूत्रों का कहना है कि इस दिशा में भी काम हो रहा है। बैंकों से ऋणों की पूरी डिटेल भी ली जा रही है। विक्रम कोठारी पंजाब नेशनल बैंक के भी देनदार हैं। बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख एसके सिंह ने बताया कि बैंक कंसोर्टियम में शामिल नहीं है। उनकी कंपनी पर बैंक का एक कार लोन बकाया है। यह राशि तीस लाख रुपये से कम है।

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